Saturday, August 12, 2023

काश।


काश हम समझ पाते कि मनुष्यों द्वारा निर्मित धार्मिक उन्माद जिसके अस्तित्व और स्वरूप का आधार कृत्रिम है, उसके तले दुबका-कुचला इंसान आज मानवता, प्रेम और सद्भाव की छांव तले पनाह की गुहार लगा रहा है। काश।

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01-08-2023

Rahul Khandelwal 

 

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