Monday, September 16, 2024

सच-झूठ और रात-दिन


होते गर सभी दिन, सिर्फ़ शामें और रातें।

तो होता आदमी भी इंसान अधिक।।

 

होती और अधिक क्षमता भी, आत्मबोध के एहसास की

झूठ की परतों से ख़ुद को, ढकते भी हम कम।।

 

ज़बान कहती वो सच, जो भीतर था कहीं दबा

डरी जो सिर्फ किरणों से है, नहीं चांदनी से अब तक।।

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16-09-2024

Rahul Khandelwal 


Note: The portrait of a painting, "True and False," painted by Jeffrey Gougeon-Fine Art America, used in this piece is taken from the internet.

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