Sunday, September 10, 2023

कभी-कभी इंसान इतना बेबस होता है कि

 

"कभी-कभी इंसान इतना बेबस होता है कि जीवन की राह पर गुज़रते हुए जब कभी अचानक वो किसी मोड़ पर अपने चेहरे पर आए (पड़े) आंसूओं को पोंछता या साफ करता है, तो उसका रुमाल उस पर दर्ज हुए निशां के ज़रिए चीख-चीख कर ख़ुद पर बीती ज़्यादती की गवाही 'पछतावे और अफ़सोस' के माध्यम से बयां करता है, उसके पास दूसरा कोई विकल्प नहीं होता।"

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10-09-2023

Rahul Khandelwal

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