तारीखों में संस्कृतियों का व्याप्त होना और समय के उपकरणों के अनुसार संस्कृतियों से जुड़े हुए उत्सवों को मनाना, जिसे ख़ुद कभी अतीत में मनुष्यों ने ही बनाया, गढ़ा और तय किया था, मनुष्यों की गतिविधियों को अपने अनुसार संचालित करता है। किसी विशेष समुदाय के मोहल्लों और घरों के पास से गुज़रती सड़कों पर लोगों और वाहनों का होना और ना होना, कभी-कभार उनका अपना निजी चुनाव नहीं होता, कुछ और भी कारक होते है जो उन्हें निर्धारित कर रहे होते है। क्या इन सबसे होने वाले बदलावों को आप अपने आस-पास देख पाते है? आप अपने जीवन में होने वाली गतिविधियों के कितने हिस्से को पूर्ण रूप से स्वयं निर्धारित करते है? गौर करिएगा।
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28-03-2024
Rahul Khandelwal

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