Tuesday, April 23, 2024

विनती


हे संचालक! दृष्टि दें और ले चल।

कृत्रिमताओं से सत्यता की ओर।।


बाहरी-अप्राकृतिक लोक से,

आंतरिक दुनिया की ओर।

इस कदर,

कि मुलाकात हो सकें–

सत्य से, स्वत्व से;

ब्रह्मन् से और आत्मन् से।।


और हो सकें,

भीतरी दुनिया की मुलाकात भी,

प्रकृति से,

और उसके परे की दुनिया से।।

________________

23-04-2024

Rahul Khandelwal 

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