सिर्फ़ शब्दों में नहीं
वजूद के रूप में बने रहना चाहता हूँ सदा
विचारों से लिपटे अनगिनत शब्दों में
स्मृतियों में इस धरती पर
नित्य ही सर्वत्र रहें अस्तित्व उनका
बस इन्हीं की अमरता चाहिए
इसी दुआ के साथ झुकाता हूं शीश
ब्रह्मन् के आगे
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18-04-2025
Rahul Khandelwal

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