Wednesday, May 7, 2025

प्रार्थना


सिर्फ़ शब्दों में नहीं

वजूद के रूप में बने रहना चाहता हूँ सदा

विचारों से लिपटे अनगिनत शब्दों में


स्मृतियों में इस धरती पर

नित्य ही सर्वत्र रहें अस्तित्व उनका

बस इन्हीं की अमरता चाहिए

इसी दुआ के साथ झुकाता हूं शीश

ब्रह्मन् के आगे

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18-04-2025

Rahul Khandelwal

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