तुमसे और कितनी कविताएँ चुरा सकता था मैं
मैं थक चुका हूँ
कोष की स्मृतियाँ अब सूख चुकी है
पिछले छः सालों से इन्हें निर्जीव होने से बचा रहा हूँ
इस संघर्ष ने तुम्हारे दरवाज़े पर कभी दस्तक नहीं दी
समुद्र नहीं जान पाता तल का रुदन
दुःख होता है इन्हें मृत्यु की ओर बढ़ता देख
स्मरण के समय साँस लेने पर
अब भारीपन महसूस होने लगा है
मेरे लिए मत आना
आना तो सिर्फ़ यादों के लिए
पृथ्वी पर स्मृतियाँ अस्तित्व की पहचान होती है
बचा रहे समय
बचा रहे स्थान
और बची रहें स्मृतियाँ
तुम्हारे स्पर्श की कामना स्मृतियों का जीवन बचा सकती है
तुम्हारा आगमन कोष में फूल खिला सकता है
प्रार्थना!
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11.04.2026
Rahul Khandelwal
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